बुधवार, 13 जुलाई 2011

ये श्रन्धांजलि है नाम उनके जिन्हें ले गया तूफान









फिर गूँज उठा भारत का गौरव
आतंको की ललकारो से
टूट न जाये होसला हमारा
इन दर्द भरी पुकारो से

अभी तो हमको कदम मिलाकर
चलना सबके साथ है
हर अँधेरी रात के बाद
फिर उजयाली रात है



ये श्रन्धांजलि है  नाम उनके
जिन्हें ले गया तूफान
नहीं छोड़ेंगे उन दरिंदो को
मन मे है बदले उफान

झलक कर गिर पड़े आंसू
मंज़र देख कर ऐसा
हमला किया किसी ने या कहे
कुदरत का खेल ये कैसा

कलम भी रो पड़ी मेरी बयां वो दर्द न कर पाई
क्यों चोट खा कर भी मुझे अकल नहीं आई

4 टिप्‍पणियां:

  1. दीपक भाई सच में बेहद दुखदाई व निंदनीय है, यह सब| पता नहीं कब तक भारत की जनता इसी प्रकार फटती रहेगी? अब तो राउल विन्ची ने कह दिया है कि एक दो हमले तो होंगे ही...हम हर हमले को तो रोक नहीं सकते न...
    ऐसे नपुंसक आदमी को यदि भारत की जनता भावी प्रधान मंत्री के रूप में देखना चाहती है तो बेशक ये जनता इसी प्रकार बम धमाकों में मरने की अधिकारी है...

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  2. दिनेश भाई आपके आगमन पर धन्यवाद

    यार समझ नहीं आता की हम किस को अपना नेता चुने

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  3. दीपक भाई बेहद दुखदाई व निंदनीय है,

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