गुरुवार, 14 जुलाई 2011

फिर निकल पड़ा खोजी दस्ता दूढ्ने उन शैतान को

अब क्या होगा सरकार क्या करेगी, एजेंसियों से क्या बयान आयेगा। कई जगह इनेर्नेट पर, टीवी पर बस सब तरफ इसी बारे मे चर्चा चल रही है हो सकता है किसी समाचार चेनल पर इसी बात को ले कर अलग अलग दलो मे बहस भी हुयी हो और मे देख न पाया हूँ। और अभी थोड़ी देर पहले ही मे एक समाचार पत्र की वैबसाइट देख रहा था तो उस पर दिया हुया था "मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दो संदिग्धों की पहचान की कोशिश शुरू हो गई है। दादर में सीसीटीवी कैमरे में कैद दो संदिग्धों पर बम प्लांट करने का शक है।"


चलो मान लेते है की वो विस्फोट करने वालों को पकड़ भी लेते है तो क्या? जिसे रंगे हाथो पकड़ा उसे तो दामाद बना के रखा हुआ है अरे वोही कसाब, फिर क्या होना जाना तो कुछ नहीं बस थोड़ी उठा पटक, फिर वही जो हर बार होता रहा है।

आश्चर्य तो मुझे तब हुया जब मेने दिवास दिनेश गौर जी के ब्लाग पर ये पंक्ति पढ़ी

"नोट : मुझे इस सरकार पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है। ये सरकार किसी आतंकवादी से कम नहीं है। किसी विशेष मुद्दे से जनता का ध्यान हटाने के लिए भी यह धमाका किया जा सकता है। अब वह मुद्दा क्या है, आप लोग समझ सकते हैं।"

इसे पढ़ कर आपके दिमाग मे क्या विचार आया, एक बार को इसे पढ़ कर तो मैं हिल ही गया था लेकिन फिर सोचा की यार हमारी

सरकार कैसी भी है पर वो ऐसा कुछ नहीं करेगी। हाँ इतना ज़रूर करेगी की सभी एजेंसियो को लगा देगी इन विस्फोट को करने वालों को  दुढ़्ने मे और क्यो भी न करे आखिर है तो भारत सरकार के दामाद ही।

मैं भी कितना लिखू और क्या लिखू, बस अंत मे यही की ज़्यादा शब्द न लिख कर बस इतना ही की आखिर क्यो तूफान के आने के बाद ही हमारी सरकार को सुरक्षा की इंतेजाम करने होते है पहले क्यो नहीं। बस यही एक मेरा छोटा सा सवाल है।

8 टिप्‍पणियां:

  1. वर्तमान दशा का सटीक आकलन....

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  2. सरकार बहुत कुछ कर सकती है.. दीपकजी जो वो कर नहीं रही है सार्थक लेख

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद

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  5. आपकी पोस्ट की चर्चा कृपया यहाँ पढे नई पुरानी हलचल मेरा प्रथम प्रयास

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